Central Teacher Eligibility Test Language II (Hindi) — Previous Year Questions
240 Language II (Hindi) questions asked in past Central Teacher Eligibility Test papers, split into 24 timed practice sets — every question with its answer and explanation.
About Central Teacher Eligibility Test Language II (Hindi) previous year questions
Language II (Hindi) PYQs asked in Central Teacher Eligibility Test
A sample of 30 questions from the full bank of 240. Try each one before opening the solution — the remaining questions are in the timed practice sets below.
Q1.नीचे दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा पूछे गए प्रश्न के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए। विद्यार्थी जीवन ही वह समय है जिसमें बच्चों के चरित्र, व्यवहार तथा आचरण को जैसा चाहें वैसा रूप दिया जा सकता है। यह अवस्था भावी वृक्ष की उस कोमल शाखा की भाँति है जिसे जिधर चाहे मोड़ा जा सकता है। पूर्णत: विकसित वृक्ष की शाखाओं को मोड़ना संभव नहीं। उन्हें मोड़ने का प्रयास करने पर वे टूट तो सकती हैं, पर मुड़ नहीं सकतीं। छात्रावस्था उस श्वेत चादर की तरह होती है जिसमें जैसा प्रभाव डालना हो, डाला जा सकता है। सफेद चादर पर एक बार जो रंग चढ़ गया सो चढ़ गया, फिर से वह पूर्वावस्था को प्राप्त नहीं हो सकती। इसलिए प्राचीन काल से ही विद्यार्थी जीवन के महत्व को स्वीकार किया गया है। इसी अवस्था में सुसंस्कार और सद्वृत्तियाँ पोषित की जा सकती हैं। इसलिए प्राचीन समय में बालक को घर से दूर गुरुकुल में रहकर कठोर अनुशासन का पालन करना होता था। व्यवहार को सुधारने का सर्वोत्तम समय कौन सा है ?
- A.प्राचीनकाल
- B.पूर्वावस्था
- C.छात्रावस्था
- D.विकसित अवस्था
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Answer: C. छात्रावस्था
Q2.नीचे दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा पूछे गए प्रश्न के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए। विद्यार्थी जीवन ही वह समय है जिसमें बच्चों के चरित्र, व्यवहार तथा आचरण को जैसा चाहें वैसा रूप दिया जा सकता है। यह अवस्था भावी वृक्ष की उस कोमल शाखा की भाँति है जिसे जिधर चाहे मोड़ा जा सकता है। पूर्णत: विकसित वृक्ष की शाखाओं को मोड़ना संभव नहीं। उन्हें मोड़ने का प्रयास करने पर वे टूट तो सकती हैं, पर मुड़ नहीं सकतीं। छात्रावस्था उस श्वेत चादर की तरह होती है जिसमें जैसा प्रभाव डालना हो, डाला जा सकता है। सफेद चादर पर एक बार जो रंग चढ़ गया सो चढ़ गया, फिर से वह पूर्वावस्था को प्राप्त नहीं हो सकती। इसलिए प्राचीन काल से ही विद्यार्थी जीवन के महत्व को स्वीकार किया गया है। इसी अवस्था में सुसंस्कार और सद्वृत्तियाँ पोषित की जा सकती हैं। इसलिए प्राचीन समय में बालक को घर से दूर गुरुकुल में रहकर कठोर अनुशासन का पालन करना होता था। छात्रावस्था की तुलना विकसित पेड़ से करना क्यों ठीक नहीं है ?
- A.पेड़ की शाखा टूट जाती है
- B.शाखा तक आसानी से पहुँचा नहीं जा सकता
- C.शाखाएँ बहुत भारी होती है
- D.विकसित पेड़ की शाखा मुड़ नहीं पाती
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Answer: D. विकसित पेड़ की शाखा मुड़ नहीं पाती
Q3.नीचे दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा पूछे गए प्रश्न के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए। विद्यार्थी जीवन ही वह समय है जिसमें बच्चों के चरित्र, व्यवहार तथा आचरण को जैसा चाहें वैसा रूप दिया जा सकता है। यह अवस्था भावी वृक्ष की उस कोमल शाखा की भाँति है जिसे जिधर चाहे मोड़ा जा सकता है। पूर्णत: विकसित वृक्ष की शाखाओं को मोड़ना संभव नहीं। उन्हें मोड़ने का प्रयास करने पर वे टूट तो सकती हैं, पर मुड़ नहीं सकतीं। छात्रावस्था उस श्वेत चादर की तरह होती है जिसमें जैसा प्रभाव डालना हो, डाला जा सकता है। सफेद चादर पर एक बार जो रंग चढ़ गया सो चढ़ गया, फिर से वह पूर्वावस्था को प्राप्त नहीं हो सकती। इसलिए प्राचीन काल से ही विद्यार्थी जीवन के महत्व को स्वीकार किया गया है। इसी अवस्था में सुसंस्कार और सद्वृत्तियाँ पोषित की जा सकती हैं। इसलिए प्राचीन समय में बालक को घर से दूर गुरुकुल में रहकर कठोर अनुशासन का पालन करना होता था। छात्रों को गुरुकुल में क्यों छोड़ा जाता था ?
- A.उनमें सुसंस्कार और सद्वृत्तियाँ पोषित हो
- B.घर के काम करना सीखें
- C.विद्यार्थी जीवन का महत्व स्वीकार हो
- D.घर में संस्कार देना संभव नहीं था
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Answer: A. उनमें सुसंस्कार और सद्वृत्तियाँ पोषित हो
Q4.नीचे दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा पूछे गए प्रश्न के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए। विद्यार्थी जीवन ही वह समय है जिसमें बच्चों के चरित्र, व्यवहार तथा आचरण को जैसा चाहें वैसा रूप दिया जा सकता है। यह अवस्था भावी वृक्ष की उस कोमल शाखा की भाँति है जिसे जिधर चाहे मोड़ा जा सकता है। पूर्णत: विकसित वृक्ष की शाखाओं को मोड़ना संभव नहीं। उन्हें मोड़ने का प्रयास करने पर वे टूट तो सकती हैं, पर मुड़ नहीं सकतीं। छात्रावस्था उस श्वेत चादर की तरह होती है जिसमें जैसा प्रभाव डालना हो, डाला जा सकता है। सफेद चादर पर एक बार जो रंग चढ़ गया सो चढ़ गया, फिर से वह पूर्वावस्था को प्राप्त नहीं हो सकती। इसलिए प्राचीन काल से ही विद्यार्थी जीवन के महत्व को स्वीकार किया गया है। इसी अवस्था में सुसंस्कार और सद्वृत्तियाँ पोषित की जा सकती हैं। इसलिए प्राचीन समय में बालक को घर से दूर गुरुकुल में रहकर कठोर अनुशासन का पालन करना होता था। छात्रावस्था सफ़ेद चादर के समान है, क्योंकि :
- A.छात्रावस्था में सफेद चादर दी जाती है
- B.सफेद चादर जल्दी मैली हो जाती है
- C.जैसा प्रभाव डालना हो डाला जा सकता है
- D.छात्रों में विरोध करने की भावना नहीं पनपती
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Answer: C. जैसा प्रभाव डालना हो डाला जा सकता है
Q5.नीचे दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा पूछे गए प्रश्न के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए। विद्यार्थी जीवन ही वह समय है जिसमें बच्चों के चरित्र, व्यवहार तथा आचरण को जैसा चाहें वैसा रूप दिया जा सकता है। यह अवस्था भावी वृक्ष की उस कोमल शाखा की भाँति है जिसे जिधर चाहे मोड़ा जा सकता है। पूर्णत: विकसित वृक्ष की शाखाओं को मोड़ना संभव नहीं। उन्हें मोड़ने का प्रयास करने पर वे टूट तो सकती हैं, पर मुड़ नहीं सकतीं। छात्रावस्था उस श्वेत चादर की तरह होती है जिसमें जैसा प्रभाव डालना हो, डाला जा सकता है। सफेद चादर पर एक बार जो रंग चढ़ गया सो चढ़ गया, फिर से वह पूर्वावस्था को प्राप्त नहीं हो सकती। इसलिए प्राचीन काल से ही विद्यार्थी जीवन के महत्व को स्वीकार किया गया है। इसी अवस्था में सुसंस्कार और सद्वृत्तियाँ पोषित की जा सकती हैं। इसलिए प्राचीन समय में बालक को घर से दूर गुरुकुल में रहकर कठोर अनुशासन का पालन करना होता था। विद्यार्थी जीवन की तुलना की गई है :
- A.गुरुकुल के बालक से
- B.वृक्ष की भावी कोमल शाखा से
- C.विकसित वृक्ष की शाखा से
- D.छात्रावस्था से
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Answer: B. वृक्ष की भावी कोमल शाखा से
Q6.नीचे दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा पूछे गए प्रश्न के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए। विद्यार्थी जीवन ही वह समय है जिसमें बच्चों के चरित्र, व्यवहार तथा आचरण को जैसा चाहें वैसा रूप दिया जा सकता है। यह अवस्था भावी वृक्ष की उस कोमल शाखा की भाँति है जिसे जिधर चाहे मोड़ा जा सकता है। पूर्णत: विकसित वृक्ष की शाखाओं को मोड़ना संभव नहीं। उन्हें मोड़ने का प्रयास करने पर वे टूट तो सकती हैं, पर मुड़ नहीं सकतीं। छात्रावस्था उस श्वेत चादर की तरह होती है जिसमें जैसा प्रभाव डालना हो, डाला जा सकता है। सफेद चादर पर एक बार जो रंग चढ़ गया सो चढ़ गया, फिर से वह पूर्वावस्था को प्राप्त नहीं हो सकती। इसलिए प्राचीन काल से ही विद्यार्थी जीवन के महत्व को स्वीकार किया गया है। इसी अवस्था में सुसंस्कार और सद्वृत्तियाँ पोषित की जा सकती हैं। इसलिए प्राचीन समय में बालक को घर से दूर गुरुकुल में रहकर कठोर अनुशासन का पालन करना होता था। 'विकसित' विशेषण बना है :
- A.संज्ञा से
- B.सर्वनाम से
- C.विशेषण से
- D.क्रिया से
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Answer: A. संज्ञा से
Q7.नीचे दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा पूछे गए प्रश्न के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए। विद्यार्थी जीवन ही वह समय है जिसमें बच्चों के चरित्र, व्यवहार तथा आचरण को जैसा चाहें वैसा रूप दिया जा सकता है। यह अवस्था भावी वृक्ष की उस कोमल शाखा की भाँति है जिसे जिधर चाहे मोड़ा जा सकता है। पूर्णत: विकसित वृक्ष की शाखाओं को मोड़ना संभव नहीं। उन्हें मोड़ने का प्रयास करने पर वे टूट तो सकती हैं, पर मुड़ नहीं सकतीं। छात्रावस्था उस श्वेत चादर की तरह होती है जिसमें जैसा प्रभाव डालना हो, डाला जा सकता है। सफेद चादर पर एक बार जो रंग चढ़ गया सो चढ़ गया, फिर से वह पूर्वावस्था को प्राप्त नहीं हो सकती। इसलिए प्राचीन काल से ही विद्यार्थी जीवन के महत्व को स्वीकार किया गया है। इसी अवस्था में सुसंस्कार और सद्वृत्तियाँ पोषित की जा सकती हैं। इसलिए प्राचीन समय में बालक को घर से दूर गुरुकुल में रहकर कठोर अनुशासन का पालन करना होता था। गुरुकुल में रहकर कठोर अनुशासन का पालन करना होता था। प्रस्तुत वाक्यांश में ''विशेषण'' होगा :
- A.गुरुकुल
- B.कठोर
- C.अनुशासन
- D.पालन
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Answer: B. कठोर
Q8.नीचे दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा पूछे गए प्रश्न के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए। विद्यार्थी जीवन ही वह समय है जिसमें बच्चों के चरित्र, व्यवहार तथा आचरण को जैसा चाहें वैसा रूप दिया जा सकता है। यह अवस्था भावी वृक्ष की उस कोमल शाखा की भाँति है जिसे जिधर चाहे मोड़ा जा सकता है। पूर्णत: विकसित वृक्ष की शाखाओं को मोड़ना संभव नहीं। उन्हें मोड़ने का प्रयास करने पर वे टूट तो सकती हैं, पर मुड़ नहीं सकतीं। छात्रावस्था उस श्वेत चादर की तरह होती है जिसमें जैसा प्रभाव डालना हो, डाला जा सकता है। सफेद चादर पर एक बार जो रंग चढ़ गया सो चढ़ गया, फिर से वह पूर्वावस्था को प्राप्त नहीं हो सकती। इसलिए प्राचीन काल से ही विद्यार्थी जीवन के महत्व को स्वीकार किया गया है। इसी अवस्था में सुसंस्कार और सद्वृत्तियाँ पोषित की जा सकती हैं। इसलिए प्राचीन समय में बालक को घर से दूर गुरुकुल में रहकर कठोर अनुशासन का पालन करना होता था। ''व्यवहार'' का सही संधि विच्छेद होगा :
- A.वि + अवहार
- B.व्य + अवहार
- C.व्यव + हार
- D.व्य् + अवहार
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Answer: A. वि + अवहार
Q9.नीचे दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा पूछे गए प्रश्न के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए। यह सच है कि वैज्ञानिक सूझबूझ ने मनुष्य को बहुत कुछ ऐसा दिया है जो कला के लिए कठिन था। लेकिन हम यह क्यों भूल जाते हैं कि जो शरीर वैज्ञानिक सिद्धान्तों के अनुसार धरती पर जन्म लेता है उस शरीर को विकसित होने के लिए, कुछ सीखने के लिए, समझने के लिए, सम्पूर्ण मानव बनने के लिए कला की आवश्यकता होती है। कला उसे संबंधों का ज्ञान कराती है। कला ही उस मनुष्य को उसके अस्तित्व का ज्ञान कराते हुए उसमें दया, करुणा, ममता एवं प्यार की भावनाएँ जगाती है। यदि विज्ञान के साथ कला का समन्वय न हो तो विज्ञान के परिणाम भयानक सिद्ध होंगे। कला मनुष्य को मनुष्य पर विश्वास करना सिखाती है। विज्ञान मनुष्य को शंकालु बना देता है, प्रिय से प्रिय के प्रति भी उसके मन में संदेह की दृष्टि जगा देता है। ऐसा समाज आखिर किस काम का ? और ऐसे समाज में पलने वाले बच्चे अंतत: क्या बनेंगे यही चिंता का विषय है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण पत्थरों के शहर, पत्थरों के लोग और पत्थरों के दिल बनाने में लगा हुआ है। आश्चर्य है कि नई पीढ़ी जिसे बचपन से भावपूर्ण वातावरण में पाला गया, बड़ा किया गया, एक कलात्मक एवं भावनात्मक परिवेश दिया गया वही आज पाषाणहृदय और आत्मकेन्द्रित होकर रह गई है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण मनुष्य को क्या बनाने में लगा हुआ है?
- A.भावुक हृदय
- B.कोमल और संकोची
- C.पत्थरों के शहर, पत्थरों के लोग और पत्थरों के दिल
- D.बहादुर और लड़ाकू
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Answer: C. पत्थरों के शहर, पत्थरों के लोग और पत्थरों के दिल
Q10.नीचे दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा पूछे गए प्रश्न के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए। यह सच है कि वैज्ञानिक सूझबूझ ने मनुष्य को बहुत कुछ ऐसा दिया है जो कला के लिए कठिन था। लेकिन हम यह क्यों भूल जाते हैं कि जो शरीर वैज्ञानिक सिद्धान्तों के अनुसार धरती पर जन्म लेता है उस शरीर को विकसित होने के लिए, कुछ सीखने के लिए, समझने के लिए, सम्पूर्ण मानव बनने के लिए कला की आवश्यकता होती है। कला उसे संबंधों का ज्ञान कराती है। कला ही उस मनुष्य को उसके अस्तित्व का ज्ञान कराते हुए उसमें दया, करुणा, ममता एवं प्यार की भावनाएँ जगाती है। यदि विज्ञान के साथ कला का समन्वय न हो तो विज्ञान के परिणाम भयानक सिद्ध होंगे। कला मनुष्य को मनुष्य पर विश्वास करना सिखाती है। विज्ञान मनुष्य को शंकालु बना देता है, प्रिय से प्रिय के प्रति भी उसके मन में संदेह की दृष्टि जगा देता है। ऐसा समाज आखिर किस काम का ? और ऐसे समाज में पलने वाले बच्चे अंतत: क्या बनेंगे यही चिंता का विषय है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण पत्थरों के शहर, पत्थरों के लोग और पत्थरों के दिल बनाने में लगा हुआ है। आश्चर्य है कि नई पीढ़ी जिसे बचपन से भावपूर्ण वातावरण में पाला गया, बड़ा किया गया, एक कलात्मक एवं भावनात्मक परिवेश दिया गया वही आज पाषाणहृदय और आत्मकेन्द्रित होकर रह गई है। मानव के संपूर्ण मानव बनने के लिए आवश्यक है :
- A.व्यावहारिक सूझबूझ
- B.कला के प्रति लगाव
- C.अपार धन संपत्ति
- D.गहन ज्ञानार्जन
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Answer: B. कला के प्रति लगाव
Q11.संरचनाओं के बारे में ज्ञान, तथा इसे सीमित अभ्यास द्वारा वर्णित करना व क्रियान्वित करना-
- A.कार्यविधिक ज्ञान है।
- B.घोषणात्मक ज्ञान है।
- C.व्याकरण अनुवाद प्रक्रिया है।
- D.भाषा प्रक्रियाएँ है।
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Answer: B. घोषणात्मक ज्ञान है।
Q12.'प्राकृतिक भाषा में संदर्भ से पठन सामग्री का स्रोत' ______ है।
- A.बनावटी पठन सामग्री
- B.साहित्यिक कार्य
- C.पाठ्य पुस्तक के लेखकों द्वारा विकसित पठन सामग्री
- D.प्रामाणिक पठन सामग्री
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Answer: D. प्रामाणिक पठन सामग्री
Q13.निम्नलिखित में से कौन सा भाषा आकलन के बारे में सही है?
- A.शिक्षार्थियों की उपलब्धि।
- B.शिक्षार्थियों के व्याकरणिक ज्ञान का आकलन करना।
- C.शिक्षार्थियों की भाषायी निपुणता का आकलन करना।
- D.यह पता करना कि शिक्षार्थियों को क्या नहीं आता है।
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Answer: C. शिक्षार्थियों की भाषायी निपुणता का आकलन करना।
Q14.निम्नलिखित में से कौन सा भाषा की कक्षा में त्रुटियों के विषय में सही है?
- A.त्रुटियाँ शिक्षार्थियों तथा शिक्षक दोनों के लिए सीखने के क्षेत्र और प्रतिपुष्टि हैं।
- B.शिक्षार्थी जब भाषा का प्रयोग करते हैं तभी के तभी त्रुटियों को सुधारना चाहिए।
- C.त्रुटियाँ केवल शिक्षक के लिए सीखने के क्षेत्र हैं।
- D.त्रुटियाँ द्वितीय भाषा में प्रथम भाषा के हस्तक्षेप का संकेत हैं।
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Answer: A. त्रुटियाँ शिक्षार्थियों तथा शिक्षक दोनों के लिए सीखने के क्षेत्र और प्रतिपुष्टि हैं।
Q15.एक भाषा शिक्षक सामाजिक विज्ञान के साथियों के साथ मिलकर 'भारत की सांस्कृतिक विविधता' पर प्रदत्त कार्य देता है/देती है। शिक्षार्थियों को इस विषय पर रिपोर्ट लिखने तथा पोस्टर तैयार करने के लिए सामाजिक विज्ञान की पुस्तक तथा इतिहास, भूगोल, संस्कृति, तथा राजनीति से संबंधित अन्य पुस्तकें तथा दस्तावेज़ों को पढ़ना है। भाषा-अधिगम की यह प्रक्रिया क्या कहलाती है?
- A.सामाजिक-विज्ञान में भाषा
- B.सामाजिक विज्ञान का प्रदत्त कार्य
- C.समूची पाठ्यचर्या में भाषा
- D.भाषा लेखन का विकास
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Answer: C. समूची पाठ्यचर्या में भाषा
Q16.एक शिक्षार्थी नए व्याकरणिक रूपों को सीखते समय पहले से सीखे हुए व्याकरणिक नियमों को आधार बनाता/बनाती है। इस अधिगम तकनीक को क्या कहा जायगा?
- A.संज्ञानात्मक युक्तियाँ
- B.मेटाकॉग्निटिव युक्तियाँ (परा संज्ञानात्मक युक्तियाँ)
- C.आकृति आधारित अधिगम
- D.सहयोगात्मक अधिगम
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Answer: A. संज्ञानात्मक युक्तियाँ
Q17.एक शिक्षार्थी सीमित समझ के साथ एक पठन सामग्री को पढ़ पाती है। वह पठन सामग्री को बहुत अच्छी तरह पढ़ पाती है तथा अवबोधन कार्य को अपने बड़े भाई की सहायता से करती है। शिक्षण-अधिगम का यह अभ्यास है ________।
- A.कोचिंग
- B.ट्यूटरिंग
- C.सहारा मिलना
- D.परिकल्पना निवेश
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Answer: C. सहारा मिलना
Q18.वह कार्य जो शिक्षार्थियों को शब्दों की आकृतियों से जुड़ने, अर्थ निकालने तथा प्रयोग करने में सहायता करता है, ________।
- A.व्याकरण सीखने में सम्प्रेषणात्मक कार्य है।
- B.अर्थ ग्रहण करने के लिए भाषा सीखने का कार्य है।
- C.व्याकरण सीखने के लिए संरचनात्मक कार्य है।
- D.कार्यविधिक व्याकरण सीखना है।
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Answer: A. व्याकरण सीखने में सम्प्रेषणात्मक कार्य है।
Q19.निम्नलिखित में से कौन सी व्याकरण सीखने में 'सचेतनता में वृद्धि करने वाली' रणनीति है?
- A.व्याकरणिक इकाईयों को नियम की तरह प्रस्तुत करना और पृथक रूप से प्रयोग करने के लिए बार-बार अभ्यास करना।
- B.व्याकरण/भाषा को संदर्भ में प्रस्तुत करना शिक्षार्थियों के संज्ञान में लाना व प्रयोग करने के योग्य बनाना तथा बाद में उनका ध्यान इसके नियमों की ओर दिलाना।
- C.व्याकरण पुस्तक अथवा अभ्यास पुस्तिका से व्याकरण के नियमों को प्रस्तुत करना और शिक्षार्थियों को हल करने के लिए अभ्यास कार्य देना।
- D.व्याकरण से जुड़े प्रश्न पठन सामग्री अथवा किसी वृतान्त से लिए जाते हैं और अभ्यास द्वारा सीखे जाते हैं।
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Answer: B. व्याकरण/भाषा को संदर्भ में प्रस्तुत करना शिक्षार्थियों के संज्ञान में लाना व प्रयोग करने के योग्य बनाना तथा बाद में उनका ध्यान इसके नियमों की ओर दिलाना।
Q20.अधिगम के सिद्धांत के रूप में रचनावाद का विश्वास है________
- A.बच्चे कक्षाकक्ष शिक्षण के माध्यम से नवीन ज्ञान प्राप्त करते हैं।
- B.भाषा संरचनात्मक अभ्यास के द्वारा सीखी जाती है।
- C.सभी शिक्षार्थी एक ही तरह से सीखते हैं।
- D.बच्चे अपने पूर्व ज्ञान से जोड़कर सीखते हैं।
Show answer
Answer: D. बच्चे अपने पूर्व ज्ञान से जोड़कर सीखते हैं।
Q21.निर्देश- नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए: स्वावलंबन के अनेक लाभ हैं। स्वावलंबी मनुष्य में अनेक गुण स्वत: ही आ जाते हैं, जैसे - आत्मविश्वास, आत्मसम्मान, दृढ़ संकल्प, साहस, धैर्य तथा आत्मबल। स्वावलंबी मनुष्य कभी निराशा के गर्त में नहीं गिरता, अपितु सदैव आशावान बना रहता है। वह अपने भाग्य का अपने हाथों से निर्माण करता हुआ कहता है - 'अपना हाथ जगन्नाथ'। आत्मनिर्भरता से कायरता, भय, संशय, आलस्य तथा चिंता दूर हो जाती है। इससे व्यक्ति अनेक कष्टों एवं बाधाओं को पद-दलित करता हुआ कंटकाकीर्ण मार्ग पर निर्भरतापूर्वक आगे बढ़ता जाता है। वह भली-भाँति समझ लेता है कि वह मनुष्य है तथा उसमें ईश्वर ने अनेक गुणों की सृष्टि की है। अत: निराश होना उसका धर्म नहीं। उसे यह भली-भाँति समझना चाहिए कि निराशा के क्षणों में भी उसे आत्मविश्वास एवं आत्मबल का त्याग नहीं करना चाहिए। स्वावलंबी मनुष्य में अनेक गुणों की सृष्टि किसने की है?
- A.स्वयं मनुष्य ने
- B.ईश्वर ने
- C.गुरू ने
- D.कष्टों व बाधाओं ने
Show answer
Answer: B. ईश्वर ने
Q22.निर्देश- नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए: स्वावलंबन के अनेक लाभ हैं। स्वावलंबी मनुष्य में अनेक गुण स्वत: ही आ जाते हैं, जैसे - आत्मविश्वास, आत्मसम्मान, दृढ़ संकल्प, साहस, धैर्य तथा आत्मबल। स्वावलंबी मनुष्य कभी निराशा के गर्त में नहीं गिरता, अपितु सदैव आशावान बना रहता है। वह अपने भाग्य का अपने हाथों से निर्माण करता हुआ कहता है - 'अपना हाथ जगन्नाथ'। आत्मनिर्भरता से कायरता, भय, संशय, आलस्य तथा चिंता दूर हो जाती है। इससे व्यक्ति अनेक कष्टों एवं बाधाओं को पद-दलित करता हुआ कंटकाकीर्ण मार्ग पर निर्भरतापूर्वक आगे बढ़ता जाता है। वह भली-भाँति समझ लेता है कि वह मनुष्य है तथा उसमें ईश्वर ने अनेक गुणों की सृष्टि की है। अत: निराश होना उसका धर्म नहीं। उसे यह भली-भाँति समझना चाहिए कि निराशा के क्षणों में भी उसे आत्मविश्वास एवं आत्मबल का त्याग नहीं करना चाहिए। 'पद-दलित' में समास है-
- A.तत्पुरुष
- B.कर्मधारय
- C.द्वंद्व
- D.अव्ययीभाव
Show answer
Answer: A. तत्पुरुष
Q23.निर्देश- नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए: स्वावलंबन के अनेक लाभ हैं। स्वावलंबी मनुष्य में अनेक गुण स्वत: ही आ जाते हैं, जैसे - आत्मविश्वास, आत्मसम्मान, दृढ़ संकल्प, साहस, धैर्य तथा आत्मबल। स्वावलंबी मनुष्य कभी निराशा के गर्त में नहीं गिरता, अपितु सदैव आशावान बना रहता है। वह अपने भाग्य का अपने हाथों से निर्माण करता हुआ कहता है - 'अपना हाथ जगन्नाथ'। आत्मनिर्भरता से कायरता, भय, संशय, आलस्य तथा चिंता दूर हो जाती है। इससे व्यक्ति अनेक कष्टों एवं बाधाओं को पद-दलित करता हुआ कंटकाकीर्ण मार्ग पर निर्भरतापूर्वक आगे बढ़ता जाता है। वह भली-भाँति समझ लेता है कि वह मनुष्य है तथा उसमें ईश्वर ने अनेक गुणों की सृष्टि की है। अत: निराश होना उसका धर्म नहीं। उसे यह भली-भाँति समझना चाहिए कि निराशा के क्षणों में भी उसे आत्मविश्वास एवं आत्मबल का त्याग नहीं करना चाहिए। 'सदैव' का संधि-विच्छेद है-
- A.सदा + एव
- B.सद् + ऐव
- C.सद + एव
- D.सत् + ऐव
Show answer
Answer: A. सदा + एव
Q24.निर्देश- नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए: स्वावलंबन के अनेक लाभ हैं। स्वावलंबी मनुष्य में अनेक गुण स्वत: ही आ जाते हैं, जैसे - आत्मविश्वास, आत्मसम्मान, दृढ़ संकल्प, साहस, धैर्य तथा आत्मबल। स्वावलंबी मनुष्य कभी निराशा के गर्त में नहीं गिरता, अपितु सदैव आशावान बना रहता है। वह अपने भाग्य का अपने हाथों से निर्माण करता हुआ कहता है - 'अपना हाथ जगन्नाथ'। आत्मनिर्भरता से कायरता, भय, संशय, आलस्य तथा चिंता दूर हो जाती है। इससे व्यक्ति अनेक कष्टों एवं बाधाओं को पद-दलित करता हुआ कंटकाकीर्ण मार्ग पर निर्भरतापूर्वक आगे बढ़ता जाता है। वह भली-भाँति समझ लेता है कि वह मनुष्य है तथा उसमें ईश्वर ने अनेक गुणों की सृष्टि की है। अत: निराश होना उसका धर्म नहीं। उसे यह भली-भाँति समझना चाहिए कि निराशा के क्षणों में भी उसे आत्मविश्वास एवं आत्मबल का त्याग नहीं करना चाहिए। किस शब्द में 'ता' प्रत्यय का प्रयोग नहीं है-
- A.दासता
- B.माता
- C.निर्भरता
- D.पात्रता
Show answer
Answer: B. माता
Q25.निर्देश- नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए: स्वावलंबन के अनेक लाभ हैं। स्वावलंबी मनुष्य में अनेक गुण स्वत: ही आ जाते हैं, जैसे - आत्मविश्वास, आत्मसम्मान, दृढ़ संकल्प, साहस, धैर्य तथा आत्मबल। स्वावलंबी मनुष्य कभी निराशा के गर्त में नहीं गिरता, अपितु सदैव आशावान बना रहता है। वह अपने भाग्य का अपने हाथों से निर्माण करता हुआ कहता है - 'अपना हाथ जगन्नाथ'। आत्मनिर्भरता से कायरता, भय, संशय, आलस्य तथा चिंता दूर हो जाती है। इससे व्यक्ति अनेक कष्टों एवं बाधाओं को पद-दलित करता हुआ कंटकाकीर्ण मार्ग पर निर्भरतापूर्वक आगे बढ़ता जाता है। वह भली-भाँति समझ लेता है कि वह मनुष्य है तथा उसमें ईश्वर ने अनेक गुणों की सृष्टि की है। अत: निराश होना उसका धर्म नहीं। उसे यह भली-भाँति समझना चाहिए कि निराशा के क्षणों में भी उसे आत्मविश्वास एवं आत्मबल का त्याग नहीं करना चाहिए। स्वावलंबी व्यक्ति से क्या अपेक्षित नहीं है-
- A.स्वयं में विश्वास
- B.निर्भीक होना
- C.आत्मनिर्भरता
- D.आत्मबल का त्याग
Show answer
Answer: D. आत्मबल का त्याग
Q26.राष्ट्रीय शिक्षा नीति _________ के अध्ययन की वकालत करती है।
- A.संस्कृत, हिन्दी, अंग्रेजी, तथा आधुनिक भारतीय भाषाएँ
- B.मातृभाषा, अंग्रेजी, राज्य की भाषा, संस्कृत, पालि, प्राकृत, तथा जनजातीय तथा छोटे-छोटे समुदायों में बोली जाने वाली भाषाएँ
- C.समूची विद्यालयी शिक्षा में अंग्रेजी एक अध्ययन के रूप में
- D.मातृभाषा/घर की भाषा, शास्त्रीय भाषाएँ, आधुनिक भारतीय भाषाएँ तथा विदेशी भाषाएँ
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Answer: D. मातृभाषा/घर की भाषा, शास्त्रीय भाषाएँ, आधुनिक भारतीय भाषाएँ तथा विदेशी भाषाएँ
Q27.एक बच्ची अपने माता-पिता के साथ बिहार से मुंबई आती है तथा वह विद्यालय में हिन्दी, संस्कृत, तथा अंग्रेजी सीखती है तथा अपने पड़ोस एवम् विद्यालय में अपने मित्रों से मराठी भाषा बहुत अच्छे से सीखती है। आप मराठी सीखने को किस रूप में वर्णित करेंगे?
- A.भाषा अर्जन
- B.भाषा अधिगम
- C.सहारा देना
- D.परिकल्पना निवेश
Show answer
Answer: A. भाषा अर्जन
Q28.किसी शिक्षार्थी को एक पाठ्य सामग्री पढ़ते समय कुछ संकेत मिलते है जो उसे अर्थ ग्रहण की प्रक्रिया में मदद करते हैं। यह किस रूप में जाना जाता है?
- A.सरसरी दृष्टि से पढ़ना
- B.बारीकी से पढ़ना
- C.अर्थगत संकेत
- D.सूत्रात्मक संकेत
Show answer
Answer: C. अर्थगत संकेत
Q29.श्रवण की किस प्रक्रिया में मुख्य विचार समझना, अनुमान लगाना निष्कर्ष आरेखित करना तथा सारांश लिखना सम्मिलित है?
- A.ऊर्ध्वोन्मुखी श्रवण प्रक्रियाएँ
- B.सूचना के लिए श्रवण
- C.अधोमुखी श्रवण प्रक्रियाएँ
- D.सूचनात्मक श्रवण
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Answer: C. अधोमुखी श्रवण प्रक्रियाएँ
Q30.संज्ञाएँ, क्रियाएँ, विशेषण, क्रिया-विशेषण _________ के रूप में वर्गीकृत किए गए हैं।
- A.विषयवस्तु के शब्द
- B.क्रिया शब्द
- C.निष्क्रिय शब्द-संपदा
- D.सक्रिय शब्द-संपदा
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Answer: A. विषयवस्तु के शब्द
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Frequently Asked Questions
How many Central Teacher Eligibility Test Language II (Hindi) previous year questions are available?
240 Language II (Hindi) questions from past Central Teacher Eligibility Test papers are available on AajExam, split into 24 practice sets. New questions are added as fresh papers are released.
Are the answers and explanations free?
Yes. Every question on this page shows its correct answer and explanation free of charge, and you do not need an account to read them. A free account only adds attempt tracking and performance analytics.
Do Central Teacher Eligibility Test repeat questions from previous years?
Exact repeats do occur, but the more reliable pattern is conceptual: the same Language II (Hindi) sub-topics reappear cycle after cycle with reworded questions. That is why working through past questions raises your score more reliably than reading theory alone.
How should I use these questions in my Central Teacher Eligibility Test preparation?
Attempt a set of ten cold, review every wrong and guessed question with its explanation, then drill the weak sub-topic on its topic page before moving on. Revisit the same set after a few days — your second-attempt accuracy is the honest measure of whether the concept stuck.
Central Teacher Eligibility Test Language II (Hindi) practice sets
Each set is a timed 10-question drill drawn from the same question bank.
- Central Teacher Eligibility Test - Language II (Hindi) PYQ Quiz 13
- Central Teacher Eligibility Test - Language II (Hindi) PYQ Quiz 24
- Central Teacher Eligibility Test - Language II (Hindi) PYQ Quiz 23
- Central Teacher Eligibility Test - Language II (Hindi) PYQ Quiz 22
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